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| Last Updated:04/12/2018

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कानून का मसौदा अंतिम चरण में, आपराधिक प्रावधान होगा शामिल. गंगा मैली करने वालों को सजा देने की तैयारी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार गंगा की सफाई से संबंधित कानून का मसौदा तैयार करने के आखिरी चरण में है। गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने और उसकी स्थायी निर्मलता सुनिश्चित करने के लिए इस कानून में आपराधिक प्रावधानों को भी शामिल किया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय इस संबंध में पर्यावरण, शहरी विकास, कानून मंत्रालय समेत कई मंत्रालयों के साथ मिलकर काम कर रहा है।
इस घटनाक्रम से जुड़े एक आधिकारिक सूत्र के अनुसार, ‘हमें इस संबंध में चार मसौदे प्राप्त हुए हैं। हम ऐसा कानून तैयार करने के आखिरी चरण में हैं, जिसका उद्देश्य प्रदूषण पर नियंत्रण करना और गंगा नदी में निरंतर सफाई बनाए रखना है।’ केंद्र ने मार्च महीने में कहा था कि गंगा नदी की स्थायी रक्षा के लिए एक कानून लाया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंगा नदी में आगे प्रदूषण रोकने के लिए ‘बिना किसी समझौते वाला मिशन मोड दृष्टिकोण’ अपनाने की वकालत की थी।
इस बीच, केंद्र ने गंगा में सीधे गिरने वाले अपशिष्ट और सीवेज को रोकने के लिए भी कुछ योजनाएं बनाई हैं। साथ ही गंगा घाटों पर होने वाले अंतिम संस्कारों के लिए कोई रास्ता निकालने के क्रम में कचरे की सफाई करना शामिल है। इसी कड़ी में, जून महीने से गंगा के किनारे आठ जगहों पर एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। इसमें नाव चलाने वालों को गंगा नदी से कचरा साफ करने के काम में शामिल किया जाएगा। इन लोगों का काम कचरे को विशेष रूप से बनाए गए डंपिग यार्ड तक लाना होगा।
सूत्रों के अनुसार, ‘इस काम के लिए नाविकों को शहरी स्थानीय निकायों द्वारा भुगतान किया जाएगा। उनका काम नदी से अंतिम संस्कार से जुड़ी चीजें और धार्मिक एवं सांस्कृतिक सामग्रियों को निकालना होगा। इस परियोजना को निगमित सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के जरिए लागू किया जाएगा। इस काम के लिए चुने गई आठ जगहों में इलाहाबाद, कानपुर, वाराणसी, मथुरा, वृृंदावन, साहिबगंज और नबादीप शामिल हैं।