JavaScript must be enabled in order for you to use the Site in standard view. However, it seems JavaScript is either disabled or not supported by your browser. To use standard view, enable JavaScript by changing your browser options.

| Last Updated:04/12/2018

Latest News

Archive

तिब्बत में तेजी से खिसकते जा रहे ग्लेशियर

बीजिंग। चीन में विशेष रूप से तिब्बत के करीब 7,600 वर्ग किमी ग्लेशियर तेजी से खिसक रहे हैं। ये ग्लेशियर पिछले 65 वर्ष में करीब 18 प्रतिशत तक खिसक चुके हैं। चीनी अधिकारियों के अनुसार वर्ष 1950 से प्रत्येक वर्ष औसतन 247 वर्ग किमी ग्लेशियर खत्म हो रहे हैं। इतना ही नहीं बढ़ते प्रदूषण के कारण माउंट एवरेस्ट बेस कैंप के चारों ओर बर्फ की मोटी परत गायब हो गई है और वहां की चट्टानें दिखने लगी हैं। इस बात से माउंट एवरेस्ट पर जाने वाले पर्वतारोही भी आश्चर्यचकित है। चीनी समाचार एजेंसी से बातचीत में तिब्बत के माउंटेनियरिंग एडमिनिस्ट्रेशन सेंटर के निदेशक जांग मिंगशिंग ने कहा कि समुद्र तल से 5,200 किलोमीटर ऊपर कोमोलांग्मा (माउंट एवरेस्ट का तिब्बती नाम) बेस कैंप मोटी बर्फ की परत से ढंका हुआ था लेकिन अब वहां सिर्फ चट्टान है। चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंस की गणना के अनुसार 1974 से माउंटेन के आसपास करीब 10 प्रतिशत ग्लेशियर सिकुड़ चुके हैं। चीन में सबसे अधिक 46 हजार ग्लेशियर हैं, सबसे अधिक किंगहाई-तिब्बत द्वीप जहां करीब विश्व का 14.5 प्रतिशत हिस्सा है। तिब्बत में हिमनदों की झील वर्ष 1930 से 1990 तक करीब 15 बार बाढ़ व कीचड़ धंसने से नष्ट हो चुकी है।
एजेंसी

प्रत्येक वर्ष औसतन 247 वर्ग किमी ग्लेशियर हो रहे हैं खत्म