JavaScript must be enabled in order for you to use the Site in standard view. However, it seems JavaScript is either disabled or not supported by your browser. To use standard view, enable JavaScript by changing your browser options.

| Last Updated:26/10/2018

Latest News

Archive

ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क विश्व धरोहर

 शिमला, कुल्लू — जैव विविधता से भरपूर कुल्लू घाटी के ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क (जीएचएनपी) को यूनेस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित करते हुए करोड़ों भारतीयों को गौरवान्वित किया है। कतर की राजधानी दोहा में चल रहे यूनेस्को के 38वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में वर्ल्ड हेरिटेज कमेटी द्वारा जीएचएनपी को भारत की सातवीं नेचुरल साइट्स के रूप में विश्व धरोहर दर्जा प्रदान करने की विधिवत घोषणा की गई। ‘फाइनली वन दि रेस एंड जीएचएनपी इन्सक्रिप्शन फार डब्ल्यूएचएस’, सोमवार दोपहर दोहा से भारतीय पर्यावरण वैज्ञानिक एस पांडे की तरफ से भेजे गए इस संदेश ने हिमाचलियों को जश्न मनाने का मौका दे दिया। खास बात यह है कि यह पहला मौका है, जब यूनेस्को ने भारत के एक साथ दो नामांकनों को स्वीकार करते हुए कुल्लू के जीएचएनपी तथा गुजरात की रानी की वाव को वर्ल्ड हेरिटेज घोषित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जीएचएनपी के साथ वर्ल्ड हेरिटेज की बड़ी उपलब्धि जुड़ने से खासकर हिमाचल के वाइल्ड लाइफ टूरिज्म को बड़ा फायदा मिलेगा। हजारों लोगों के लिए प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। वहीं कुल्लू-मनाली का पर्यटन व्यवसाय भी इससे एकाएक रफ्तार पकड़ लेगा। वर्ल्ड हेरिटेज का रुतबा मिलने से यूनेस्को की तरफ से मिलने वाली  आर्थिक मदद से जीएचएनपी के विकास विस्तार का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा। वर्ल्ड हेरिटेज की यह उपलब्धि जीएचएनपी के कंजरवेशन के लिए प्राणवायु मानी जा रही है। वहीं विलुप्त होने की कगार पर खड़े बर्फानी तेंदुए, हिमालयी के काले भालू, हिमालयन थार, जाजुराणा समेत अनेकों वन्य प्राणियों के संरक्षण में मदद मिलेगी।  जीएचएनपी के अरण्यपाल बीएस राणा खबर की पुष्टि करते हुए कहते हैं कि करोड़ों भारतीयों के लिए वाकई यह बड़ा दिन है। दोहा से मिली खुशी को शब्दों में बयां करना मुश्किल हो रहा है।

जीएचएनपी का सफर

कुल्लू की बंजार घाटी में वर्ष 1984 में जीएचएनपी की स्थापना हुई। वर्ष 1999 में भारत सरकार ने इसे नेशनल पार्क का दर्जा देते हुए बकायदा इसकी अधिसूचना जारी की। पिछले साल कम्बोडिया सम्मेलन में भारत सरकार ने जीएचएनपी का वर्ल्ड हेरिटेज के लिए नामांकन किया, लेकिन मामला रैफर हो गया। अब दोहा के प्लेटफार्म से यूनेस्को ने जीएचएनपी को विश्व धरोहर घोषित करते हुए करोड़ों हिंदोस्तानियों को गौरवान्वित किया है।

 जैव विविधता बनाती है खास

452 वर्ग मील क्षेत्र में फैले ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में 25 प्रकार के वन, 800 किस्म के पौधे, 181 परिंदों की प्रजातियां, 375 पशुओं की नस्लें, 31 किस्म के स्तनधारी जीव, 127 सूक्ष्म कीड़े-मकोड़ों की प्रजातियों के साथ ही जीवन रक्षक जैव विविधता इसे खास बनाती हैं। यूनेस्को की गाइडलाइन पर इसी साल तीर्थन और सैंज वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरियों को भी जीएचएनपी में शामिल कर लिया गया है।

Divya Himachal (24/06/2014)