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| Last Updated:09/12/2019

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प्लास्टिक वेस्ट चलाएगा डीजल जेनरेटर

 प्लास्टिक और इससे जुडे़ अन्य प्रकार के वेस्ट से छुटकारा पाने के लिए नई तकनीक ईजाद हो गई है, इस तकनीक से न केवल प्लास्टिक व दूसरे ऐसे वेस्ट से मुक्ति मिलेगी, बल्कि रसोई घर का चूल्हा भी चलेगा। यही नहीं, इस नई तकनीक ने शहरों से निकलने वाले टनों कूड़ा-कर्कट और प्लास्टिक, रबड़ व इंडस्ट्रियल वेस्ट को भी रिसाइकिल करने का हल निकाल लिया है। वहीं इसी तकनीक से जहां गैस बनेगी, वहीं एक अन्य तरल पदार्थ का भी जन्म होगा, जिससे डीजल जेनरेटर चलाए जा सकेंगे। इस तकनीक में न तो प्लास्टिक व दूसरे वेस्ट को जलाया जाएगा और न ही दबाया जाएगा। रिसाइकिल करने के बाद बहुत कम मात्रा में सिर्फ कार्बन ही बचेगा। इस नई एनर्जी रिकवरी तकनीक को इनोवेशन इंडस्ट्रियल इक्यूपमेंट प्राइवेट लिमिटेड ने तैयार किया है। वहीं अब इस नई तकनीक को मंडी की रेडीइनबायोटेक कंपनी इसे हिमाचल में शुरू करने जा रही है। रेडीइनबायोटेक ने इसका प्रस्ताव मंडी जिला प्रशासन को भी दे दिया है और जिला उपायुक्त ने इस पर मंथन करने के भी आदेश अधिकारियों को दे दिए हैं। रेडीइनबायोटेक के निदेशक कुलदीप शर्मा व जीडी ठाकुर ने बताया कि यह रिकवरी एनर्र्र्जी तकनीक दूसरी ऐसी तकनीकों से पूरी तरह से भिन्न है। इसमें एक छोटा प्लांट अस्पताल या नगर परिषद के कूड़ा संयंत्र में स्थापित करना पड़ता है। इसके बाद अस्पताल से निकलने वाले सारे बायोमेडिकल वेस्ट को इस प्लांट की भट्ठी में डाला जाएगा। जहां बिजली के जरिए सारे वेस्ट को पिघला दिया जाता है। इसके बाद इस प्लांट से रसोई घर के लिए गैस और डीजल प्लांट के लिए तेल भी निकलेगा, जबकि दूसरी किसी भी ऐसी तकनीक में ऐसा नहीं होता है। यही नहीं, इस इलेक्ट्रिकल भट्ठी में से न तो धुआं निकलेगा और न ही किसी प्रकार के पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले कई केमिकल प्रयोग होंगे। उन्होंने कहा कि इस तकनीक को उत्तर प्रदेश प्रदूषण कंट्रोल से अनुमति मिल चुकी है और कंपनी ने हिमाचल प्रदेश के प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को भी आवेदन कर दिया है। इसके साथ ही इस तकनीक के जरिए हजारों लोगों को रोजगार भी मिलेगा।

Divya Himachal (24-01-2014)