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| Last Updated:04/12/2018

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ग्रीन ट्रिब्यूनल ने क्रशर कराया बंद, प्रदूषण फैलाने पर 50 हजार मुआवजे के आदेश

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की शिमला सर्किट बैंच ने टौणीदेवी के बुहाणा गांव के स्टोन क्रशर के संचालन पर रोक लगा दी है। क्रशर से पर्यावरण प्रदूषण होने के कारण उस पर 50 हजार मुआवजा पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड को देने के निर्देश दिए हैं।

ये फैसला चेयरमैन जस्टिस स्वतंत्र कुमार, मेंबर जस्टिस यूडी सालवी, एक्सपर्ट मेंबर डॉ. डीके अग्रवाल और विक्रम सिंह सर्किट बैंच ने सुनाया। ये क्रशर शिव शक्ति नाम से अक्टूबर 2011 में शुरू हुआ था। ग्रामीणों ने इसके विरोध में ग्राम बचाओ संघर्ष समिति टीसी गुलेरिया की अध्यक्षता में गठित की। इसको लेकर प्रदर्शन भी किए। फैसला आने के बाद क्रशर बंद कर दिया है। अब सर्किट बैंच की अदालत में 27 मार्च को जनहित याचिका की अगली सुनवाई होगी।

स्प्रिंकल भी चलाना होगा

ट्रिब्यूनल के आदेशों के तहत पर्यावरण कंट्रोल बोर्ड, जियोलाजिस्ट और अन्य पर्यावरण वैज्ञानिकों की संयुक्त टीम राज्य सरकार गठित करके तीन सप्ताह के भीतर इसका निरीक्षण करेगी। यदि निरीक्षण के बाद एयर क्वालिटी सेंपल मापदंडों पर खरे उतरे तो स्वीकृति मिलेगी। जिस जगह लाइसेंस नहीं वहां खनन नहीं कर सकेंगे। मुआवजा राशि को पर्यावरण रखरखाव पर खर्च करना होगा। हर समय स्टोन क्रशर मालिक को वाटर स्प्रिंकल चालू रखना होगा। इसकी गणना हर दिन होनी चाहिए। अदालत का कहना है कि स्टोन क्रशर गंभीर वायु प्रदूषण करता है।

Dainik Bhaskar (13-01-2014)