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| Last Updated:04/12/2018

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बिना जलाए नष्ट होगा बायो मेडिकल वेस्ट

अस्पतालों से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट को अब विदेशों की तर्ज पर बिना जलाए भी नष्ट किया जा सकता है। इसके लिए संबंधित संस्था के पास पर्याप्त मात्रा में सेनेटरी लैंड होनी अनिवार्य है। विदेशी कंपनियों के साथ मिलकर दिल्ली सहित देश के कुछ अन्य राज्यों में मेडिकल वेस्ट को नॉन बर्न टेक्नोलॉजी के तहत नष्ट किया जा रहा है।
इसके लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से मंजूरी दी जाती है। हिमाचल से फिलहाल किसी भी अस्पताल व नगर निगम प्रबंधन ने आवेदन नहीं किया गया है। यह बात शिमला के होटल हॉलीडे होम में पर्यावरण विज्ञान एवं तकनीकी विभाग की ओर से बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट विषय पर आयोजित कार्यशाला में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में एचडब्ल्यूएमडी के प्रमुख डॉ. बी. विनोद बाबू ने कही। उन्होंने कहा कि नॉन बर्न टेक्नोलॉजी एक नई तकनीक है और पर्यावरण भी किसी तरह से नुकसान नहीं पहुंचाती है। अस्पताल से निकलने वाले सभी तरह के वेस्ट को एक साथ ही श्रेडिंग करने के बाद रसायनों के माध्यम से संक्रमण रहितकर इसे सॉलिड वेस्ट की तरह सेनेटरी लैंड में डाला जा सकेगा। डॉ. बाबू के अनुसार इससे किसी भी प्रकार के संक्रमण का कोई खतरा नहीं होगा।
कार्यशाला में राज्य स्तरीय अस्पतालों और मेडिकल कालेजों के मुख्य चिकित्सा अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी और प्रिंसिपलों के अलावा बायोमेडिकल मैनेजमेंट से जुड़े संस्थानों के 150 से अधिक प्रमुख शामिल हुए। इसका शुभारंभ प्रधान सचिव पर्यावरण विज्ञान एवं तकनीकी विभाग के प्रधान सचिव तरुण श्रीधर ने किया। इस अवसर डीईएसटी के निदेशक डॉ. एसएस नेगी, पूर्व प्रिंसिपल सांइटिफिक ऑफिसर दक्षा गुप्ता, हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रिंसिपल सांइटिफिक ऑफिसर डॉ. एचसी शर्मा, एमएस टॉक्सिक लिंक दिल्ली के प्रोग्राम ऑफिसर राहुल थंपी ने कार्यशाला में बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट के बारे में प्रस्तुतियां दी।
पर्यावरण विज्ञान एवं तकनीकी विभाग के प्रिंसिपल सांइटिफिक ऑफिसर डॉ. सुरेश अत्री ने बताया कि इसके बाद मेडिकल ऑफिसर, मेट्रन, स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।
संस्था के पास पर्याप्त सेनेटरी लैंड होनी अनिवार्य

Amar Ujala (10-01-2014)