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| Last Updated:14/11/2018

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ग्लेशियर पर कालिख के आसार

कुल्लू — बढ़ते वायु प्रदूषण से हिमाचल के ग्लेशियरों की भी अब हालत बिगड़ने लगी है। टूरिस्ट सीजन में वाहनों से निकलने वाली जहरीली गैसों से कई ग्लेशियरों की ऊपरी सतह काली पड़ने का खतरा पैदा हो गया है। मनाली के निकट धुंधी ग्लेशियर में एरासोल आप्टिकल डेप्थ (यूडी) प्वाइंट एक पाई गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) हिमाचल के ग्लेशियरों की मानिटरिंग करने जा रहा है। अगले तीन सालों तक वैज्ञानिक मनाली के समीप धुंधी ग्लेशियर की हर गतिविधि पर पैनी नजर रखेंगे। मई माह से मानिटरिंग शुरू होगी। इसरो समेत देश के प्रतिष्ठित 16 संस्थानों के वैज्ञानिकों ने हाल ही में कुल्लू-मनाली का गुपचुप दौरा करते हुए वादी के पर्यावरण में आए बदलावों की तह तक जाने का भी प्रयास किया है। कुल्लू के मौहल में चल रहे देश के प्रतिष्ठित जेबी पंत हिमालयन पर्यावरण एवं विकास संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. जेसी कुनियाल की अगवाई में वैज्ञानिकों की टीम अत्याधुनिक उपकरणों से धुंधी ग्लेशियर की मानिटरिंग और रिसर्च प्रोजेक्ट पर काम करेगी। पोर्टेबल एथलोमीटर जैसे अत्याधुनिक उपकरण से धुंधी ग्लेशियर में ब्लैक कार्बन के प्रभावों का वैज्ञानिक अध्ययन करेंगे। इसरो के लिए काम करने वाले आर्य भट्ट रिसर्च इंस्टीच्यूट नैनीताल, स्पेस फिजिकल लैबोरेटरी  त्रिवेंद्रम, आईआईटी कानपुर, आईआईसीटी हैदराबाद तथा असम यूनिवर्सिटी समेत अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के वैज्ञानिकों ने हाल ही में कुल्लू-मनाली का गुपचुप दौरा करते हुए ग्लोबल वार्मिंग से हिमालयी पर्यावरण पर पड़ रहे प्रभावों का अध्ययन किया है। डा. जेसी कुनियाल कहते हैं कि मई माह में मौसम खुलते ही वैज्ञानिकों की टीम धुंधी ग्लेशियर का रुख करते हुए रिसर्च वर्क शुरू करेगी।

Divya Himachal (04-04-2014)